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12 सितंबर की राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए दरभंगा में शुरू हुई व्यापक तैयारी

राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता के लिए तैयारियां तेज, ग्राम कचहरियों में लंबित मामलों के निपटारे पर विशेष जोर

दरभंगा, बिहार। आगामी 12 सितंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए), दरभंगा द्वारा तैयारियों को तेज कर दिया गया है। इसी क्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, दरभंगा श्री अजय कुमार शर्मा के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव श्रीमती आरती कुमारी ने प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की। बैठक का मुख्य उद्देश्य ग्राम कचहरियों तथा विभिन्न विभागों में लंबित सुलह योग्य मामलों के अधिकाधिक निपटारे को सुनिश्चित करना तथा आम लोगों तक राष्ट्रीय लोक अदालत के लाभों की जानकारी पहुंचाना था।

बैठक को संबोधित करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव श्रीमती आरती कुमारी ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत न्याय तक आसान, सुलभ और त्वरित पहुंच उपलब्ध कराने का एक प्रभावी माध्यम है। इसके माध्यम से वर्षों से लंबित विवादों का सौहार्दपूर्ण वातावरण में समाधान संभव हो पाता है। उन्होंने प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्र की ग्राम कचहरियों में लंबित सुलह योग्य मामलों की पहचान करें तथा ऐसे मामलों का चयन कर संबंधित पक्षकारों को नोटिस जारी कराने की प्रक्रिया प्रारंभ करें।

उन्होंने कहा कि ग्राम कचहरी स्तर पर लंबित मामलों के निपटारे के लिए पंचायत प्रतिनिधियों और ग्राम कचहरी के सदस्यों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। संबंधित पक्षों को राष्ट्रीय लोक अदालत के महत्व, उपयोगिता तथा इसके लाभों के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाए ताकि वे स्वेच्छा से अपने विवादों के समाधान के लिए आगे आएं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए और ग्राम कचहरियों के माध्यम से अधिकाधिक लोगों तक राष्ट्रीय लोक अदालत की जानकारी पहुंचाई जाए।

बैठक में सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय लोक अदालत केवल ग्राम कचहरियों तक सीमित नहीं है, बल्कि न्यायालयों में लंबित शमनीय आपराधिक मामले, दीवानी विवाद, बैंक ऋण से जुड़े मामले, मोटर दुर्घटना दावा (क्लेम) मामले, बिजली विभाग, माप-तौल विभाग तथा अन्य विभिन्न विभागों से संबंधित सुलह योग्य मामलों का भी निपटारा राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से किया जाएगा। ऐसे में संबंधित विभागों को भी अपने-अपने स्तर पर लंबित मामलों की सूची तैयार कर पक्षकारों को लोक अदालत में भाग लेने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य केवल मामलों का निपटारा करना नहीं है, बल्कि पक्षकारों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध स्थापित करना और न्यायिक प्रक्रिया को सरल एवं कम खर्चीला बनाना भी है। लोक अदालत में मामलों के निपटारे से पक्षकारों का समय और धन दोनों की बचत होती है। साथ ही, लोक अदालत के निर्णय अंतिम होते हैं तथा इनके विरुद्ध सामान्यतः अपील का प्रावधान नहीं होता, जिससे विवाद का स्थायी समाधान संभव हो पाता है।

श्रीमती आरती कुमारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे आगामी समीक्षा बैठक में अपने-अपने क्षेत्र से चयनित मामलों की अद्यतन सूची के साथ उपस्थित हों। उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्रखंड स्तर पर राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए चिन्हित मामलों की नियमित समीक्षा की जाएगी ताकि अधिक से अधिक मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने इस कार्य को गंभीरता से लेने और समयबद्ध तरीके से सभी आवश्यक तैयारियां पूरी करने पर बल दिया।

बैठक के दौरान सचिव ने आम नागरिकों के लिए उपलब्ध एक अन्य महत्वपूर्ण वैकल्पिक विवाद निपटान व्यवस्था, स्थायी लोक अदालत (Permanent Lok Adalat) के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जनोपयोगी सेवाओं से संबंधित विवादों के निपटारे के लिए एडीआर भवन, दरभंगा में स्थायी लोक अदालत निरंतर कार्यरत है। यहां बिजली, पानी, टेलीफोन, परिवहन, ऋण तथा अन्य जनोपयोगी सेवाओं से जुड़े मामलों का मुकदमा दायर होने से पहले ही समाधान कराया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि स्थायी लोक अदालत की बैठक प्रत्येक कार्य दिवस को आयोजित होती है और यहां पक्षकार आपसी समझौते के आधार पर अपने विवादों का निपटारा करा सकते हैं। यह व्यवस्था आम लोगों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया से बचाने के साथ-साथ शीघ्र न्याय उपलब्ध कराने में अत्यंत सहायक सिद्ध हो रही है। इसके बावजूद जानकारी के अभाव में बड़ी संख्या में लोग इस महत्वपूर्ण व्यवस्था का लाभ नहीं उठा पाते हैं।

सचिव ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कई बार पीड़ित व्यक्ति उचित मंच की जानकारी नहीं होने के कारण न्याय प्राप्त करने से वंचित रह जाते हैं। इसलिए पंचायत प्रतिनिधियों, ग्राम कचहरियों तथा स्थानीय प्रशासन की यह जिम्मेदारी है कि वे आम नागरिकों को स्थायी लोक अदालत और राष्ट्रीय लोक अदालत जैसी व्यवस्थाओं की जानकारी दें। उन्होंने कहा कि यदि लोगों को समय पर सही जानकारी उपलब्ध कराई जाए तो बड़ी संख्या में विवादों का समाधान न्यायालय जाने से पहले ही संभव हो सकता है।

उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे अपने क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम, बैठकें, जनसंवाद तथा अन्य प्रचार-प्रसार गतिविधियों का आयोजन करें। पंचायत भवनों, सार्वजनिक स्थलों तथा सरकारी कार्यालयों में राष्ट्रीय लोक अदालत से संबंधित सूचना प्रदर्शित की जाए ताकि अधिकाधिक लोगों को इसकी जानकारी मिल सके। इसके अलावा ग्राम पंचायतों के माध्यम से घर-घर तक सूचना पहुंचाने का भी प्रयास किया जाए।

बैठक में यह भी चर्चा की गई कि राष्ट्रीय लोक अदालत न्यायिक व्यवस्था पर बढ़ते भार को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इससे न केवल लंबित मामलों की संख्या में कमी आती है, बल्कि समाज में आपसी सौहार्द और सामाजिक समरसता को भी बढ़ावा मिलता है। लोक अदालतों के माध्यम से विवादों का समाधान आपसी सहमति से होने के कारण दोनों पक्ष संतुष्ट रहते हैं और लंबे समय तक चलने वाले मुकदमों से बच जाते हैं।

जिला विधिक सेवा प्राधिकार, दरभंगा ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे राष्ट्रीय लोक अदालत एवं स्थायी लोक अदालत की सुविधाओं का अधिकाधिक लाभ उठाएं। जिन लोगों के मामले न्यायालयों, ग्राम कचहरियों या विभिन्न विभागों में लंबित हैं, वे अपने मामलों के शीघ्र एवं सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए राष्ट्रीय लोक अदालत में भाग लें। साथ ही, जनोपयोगी सेवाओं से संबंधित विवाद होने की स्थिति में स्थायी लोक अदालत में आवेदन देकर त्वरित न्याय प्राप्त करें।

बैठक में उपस्थित अधिकारियों ने राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने के लिए पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया तथा अपने-अपने क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर जन-जागरूकता अभियान चलाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। जिला विधिक सेवा प्राधिकार को उम्मीद है कि सभी संबंधित विभागों, पंचायत प्रतिनिधियों और आम नागरिकों के सहयोग से आगामी 12 सितंबर को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में बड़ी संख्या में मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया जाएगा, जिससे लोगों को त्वरित, सस्ता और सुलभ न्याय उपलब्ध हो सकेगा।

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