सौरभ शेखर श्रीवास्तव की ब्यूरो रिपोर्ट, दरभंगा। फैज अहमद को इंसाफ दिलाने की मांग को लेकर शुक्रवार की शाम दरभंगा शहर में जनभावनाओं का अभूतपूर्व प्रदर्शन देखने को मिला। शहर के विभिन्न इलाकों से आए हजारों लोगों ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर एक विशाल कैंडल मार्च निकाला और प्रशासन से मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं त्वरित जांच की मांग की। मार्च में युवाओं, महिलाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, व्यापारियों, बुद्धिजीवियों और आम नागरिकों की बड़ी भागीदारी रही। लोगों ने एक स्वर में कहा कि फैज को न्याय मिलना चाहिए और दोषियों को कानून के तहत कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए।

कैंडल मार्च की शुरुआत शाम करीब 6 बजे फैज अहमद के आवास पुरानी मुंसिफी, मौलागंज, नाका नंबर-5, मिर्जापुर से हुई। वहां से हजारों लोगों का हुजूम शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए दरभंगा टावर पहुंचा, जहां यह मार्च एक विशाल जनसभा में तब्दील हो गया। पूरे मार्ग में लोगों ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर शांतिपूर्ण ढंग से न्याय की मांग उठाई। मार्च के दौरान “फैज को इंसाफ दो”, “दोषियों को सजा दो”, “निष्पक्ष जांच करो” और “न्याय चाहिए” जैसे नारों से पूरा वातावरण गूंजता रहा।
शांतिपूर्ण लेकिन मजबूत संदेश के साथ निकाला गया मार्च
मार्च में शामिल लोगों ने कहा कि यह प्रदर्शन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं बल्कि न्याय और सच्चाई की मांग के लिए आयोजित किया गया है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि वे कानून और संविधान में विश्वास रखते हैं तथा चाहते हैं कि जांच पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ हो। लोगों ने कहा कि किसी भी निर्दोष को परेशान नहीं किया जाना चाहिए, लेकिन जो भी दोषी हो उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए।
- फैज को इंसाफ दिलाने के लिए दरभंगा में उमड़ा जनसैलाब
- हजारों लोगों ने निकाला कैंडल मार्च
- एक सप्ताह में निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो बड़े आंदोलन की चेतावनी
- आरोपी के CDR और CCTV फुटेज सार्वजनिक करने की मांग

कैंडल मार्च के दौरान शहर के कई इलाकों में लोगों ने अपने घरों और दुकानों के बाहर खड़े होकर मार्च का समर्थन किया। कई स्थानों पर लोगों ने मोमबत्तियां जलाकर श्रद्धांजलि भी अर्पित की। बड़ी संख्या में महिलाएं और छात्र-छात्राएं भी मार्च में शामिल हुए, जिसने इसे एक व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप दे दिया।

जनसभा में उठी निष्पक्ष जांच की मांग
दरभंगा टावर पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि फैज अहमद से जुड़े मामले की जांच पूरी निष्पक्षता के साथ की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस और जांच एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि वे मामले के हर पहलू की गंभीरता से जांच करें और सच्चाई को सामने लाएं।
वक्ताओं ने मांग की कि मामले के मुख्य आरोपी को रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की जाए, ताकि घटना से जुड़े सभी तथ्य सामने आ सकें। उन्होंने कहा कि यदि इस घटना में किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका रही है तो उसे भी कानून के दायरे में लाकर कार्रवाई की जानी चाहिए।
सभा में मौजूद लोगों ने कहा कि जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए जांच प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि जांच की प्रगति के संबंध में समय-समय पर सार्वजनिक जानकारी भी दी जाए, ताकि किसी तरह की अफवाहों या भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो।
CDR और CCTV फुटेज सार्वजनिक करने की मांग
सभा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने कुछ महत्वपूर्ण मांगें भी प्रशासन के सामने रखीं। उन्होंने कहा कि मामले से जुड़े आरोपी के मोबाइल फोन का कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) सार्वजनिक किया जाए, ताकि घटना से पहले और बाद की परिस्थितियों को स्पष्ट किया जा सके।

इसके अलावा लोगों ने संबंधित एजेंसी और आसपास के क्षेत्रों के सीसीटीवी फुटेज भी सार्वजनिक करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि एजेंसी खुलने के समय से लेकर फैज अहमद की हत्या तक की पूरी अवधि के फुटेज सामने आने से कई महत्वपूर्ण तथ्य उजागर हो सकते हैं और जांच को सही दिशा मिल सकती है।
लोगों ने यह भी मांग की कि उपलब्ध सभी डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की वैज्ञानिक तरीके से जांच कराई जाए और उसकी रिपोर्ट भी जांच प्रक्रिया का हिस्सा बनाई जाए।
FSL जांच की उठी मांग
जनसभा में वक्ताओं ने कहा कि मामले में उपलब्ध सभी तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों की फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) से जांच कराई जानी चाहिए। उनका कहना था कि आधुनिक वैज्ञानिक जांच के माध्यम से घटना से जुड़े तथ्यों की पुष्टि अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि किसी भी गंभीर आपराधिक मामले में फॉरेंसिक जांच महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और इससे न्यायिक प्रक्रिया भी मजबूत होती है। इसलिए सभी साक्ष्यों को सुरक्षित रखते हुए उनकी विशेषज्ञ जांच कराई जानी चाहिए।
दोषियों की गिरफ्तारी और स्पीडी ट्रायल की मांग
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसकी तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए। साथ ही सभी आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाए ताकि घटना की पूरी सच्चाई सामने आ सके।
सभा में यह मांग भी उठी कि मामले की सुनवाई स्पीडी ट्रायल के माध्यम से कराई जाए। लोगों का कहना था कि न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी से पीड़ित परिवार की पीड़ा बढ़ती है और समाज में गलत संदेश जाता है। इसलिए इस मामले की त्वरित सुनवाई कर दोषियों को कानून के अनुसार कठोरतम सजा दिलाई जानी चाहिए।
कई वक्ताओं ने कहा कि यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो दोषियों को ऐसी सजा मिले जो समाज के लिए एक उदाहरण बने और भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस प्रकार के अपराध करने का साहस न कर सके।


‘न्याय में देरी, न्याय से इनकार के समान’
कैंडल मार्च में शामिल लोगों ने कहा कि न्याय व्यवस्था पर जनता का भरोसा बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि “न्याय में देरी, न्याय से इनकार के समान है” और इसलिए मामले की जांच और सुनवाई दोनों प्रक्रियाओं को तेज गति से आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि फैज अहमद के परिवार को न्याय मिलने तक वे अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे। लोगों ने यह भी कहा कि यह केवल एक परिवार की लड़ाई नहीं है, बल्कि समाज में न्याय और कानून के शासन की रक्षा का सवाल है।
एक सप्ताह का अल्टीमेटम, बड़े आंदोलन की चेतावनी
सभा के दौरान लोगों ने प्रशासन को एक सप्ताह का समय देते हुए चेतावनी दी कि यदि इस अवधि के भीतर निष्पक्ष जांच की दिशा में ठोस और संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती है, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि भविष्य में बड़े स्तर पर धरना, प्रदर्शन और जनआंदोलन आयोजित किए जा सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन न्याय मिलने तक जारी रहेगा।
लोगों का कहना था कि प्रशासन को जनता की भावनाओं और पीड़ित परिवार की अपेक्षाओं को गंभीरता से लेना चाहिए। यदि जांच में पारदर्शिता और निष्पक्षता दिखाई देती है तो इससे लोगों का विश्वास मजबूत होगा।
दरभंगा पुलिस से निष्पक्ष कार्रवाई की अपील
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने दरभंगा पुलिस और जिला प्रशासन से अपील की कि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि कानून के सामने सभी समान हैं और किसी भी दोषी को बचाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
लोगों ने यह भी कहा कि यदि मामले को ठंडे बस्ते में डालने या जांच को प्रभावित करने का प्रयास किया गया, तो जनता पहले से अधिक संख्या में सड़कों पर उतरकर न्याय की मांग करेगी।

मोमबत्तियों की रोशनी में न्याय की पुकार
शाम ढलते ही जब हजारों मोमबत्तियां एक साथ जलीं, तो पूरा माहौल भावुक और गंभीर हो गया। लोगों के चेहरों पर न्याय की उम्मीद और व्यवस्था से जवाबदेही की मांग साफ दिखाई दे रही थी। कैंडल मार्च केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं बल्कि एक सामूहिक संदेश था कि समाज अन्याय के खिलाफ एकजुट है और न्याय की लड़ाई में पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है।
कार्यक्रम का समापन दो मिनट के मौन और फैज अहमद को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुआ। इसके बाद लोगों ने शांतिपूर्वक अपने-अपने घरों की ओर प्रस्थान किया, लेकिन एक संकल्प के साथ कि फैज को न्याय दिलाने की आवाज तब तक उठती रहेगी, जब तक सच्चाई सामने नहीं आ जाती और दोषियों को कानून के अनुसार सजा नहीं मिल जाती।

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