हरियाणा के झज्जर जिले में हुए एक दर्दनाक विवाहिता हत्याकांड में न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी पति को उम्रकैद की सजा दी है। करीब चार साल तक चले इस केस में अदालत ने सभी तथ्यों, सबूतों और गवाहों के बयानों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया। इस फैसले ने जहां पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया, वहीं समाज में एक कड़ा संदेश भी दिया है कि दहेज जैसी कुप्रथा के कारण होने वाले अपराधों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

यह मामला रोहतक की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय में सुनवाई के दौरान सामने आया, जहां न्यायाधीश संदीप कुमार दुग्गल ने आरोपी पति सुरेंद्र को मुख्य दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके अलावा, इस हत्याकांड में शामिल दो अन्य आरोपियों को भी उनके अपराध के अनुसार अलग-अलग धाराओं के तहत सजा दी गई।
मामले की शुरुआत झज्जर जिले के गांव रेवाड़ी खेड़ा से हुई थी। यहां के निवासी हरबीर सिंह ने अपनी बहन रिंकू की मौत को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। हरबीर ने बताया कि उसकी बहन की शादी वर्ष 2013 में गांव गांधरा निवासी सुरेंद्र के साथ हुई थी। शादी के शुरुआती समय में सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन कुछ वर्षों बाद ही ससुराल पक्ष का रवैया बदलने लगा।
परिजनों के अनुसार, शादी के करीब दो साल बाद से ही रिंकू को दहेज के लिए परेशान किया जाने लगा। उसका पति, ससुर और अन्य परिवार के सदस्य लगातार उस पर अतिरिक्त दहेज लाने का दबाव डालते थे। इस वजह से रिंकू को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। कई बार उसने अपने मायके वालों को इस बारे में जानकारी दी, लेकिन हर बार परिवार ने समझौते की कोशिश की और उसे वापस ससुराल भेज दिया गया।
समय के साथ यह प्रताड़ना बढ़ती चली गई और अंततः एक दिन यह अत्याचार उसकी जान का कारण बन गया। 26 फरवरी 2022 को रिंकू के परिवार को एक फोन कॉल आया, जिसमें बताया गया कि उसे करंट लग गया है। यह सुनकर परिवार के लोग तुरंत गांव गांधरा पहुंचे।
जब परिवार मौके पर पहुंचा तो उन्होंने देखा कि रिंकू का शव जमीन पर पड़ा हुआ था। उसके शरीर पर कई चोटों के निशान थे, जो इस बात की ओर इशारा कर रहे थे कि उसकी मौत किसी हादसे का परिणाम नहीं, बल्कि एक सुनियोजित हत्या थी। यह देखकर परिवार के लोगों के होश उड़ गए और उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। जांच के दौरान कई अहम तथ्य सामने आए, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि रिंकू की मौत प्राकृतिक नहीं थी। इसके बाद पुलिस ने पति, ससुर और अन्य ससुराल पक्ष के लोगों के खिलाफ हत्या और दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज किया।
जांच के दौरान पुलिस ने कई गवाहों के बयान दर्ज किए और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए। इन सभी सबूतों ने यह साबित करने में मदद की कि रिंकू को लंबे समय से प्रताड़ित किया जा रहा था और अंततः उसकी हत्या कर दी गई।
मामला अदालत में पहुंचा, जहां इसकी सुनवाई करीब चार वर्षों तक चली। इस दौरान अभियोजन पक्ष ने मजबूत सबूत पेश किए और गवाहों के बयान अदालत में दर्ज कराए। वहीं, बचाव पक्ष ने भी अपनी दलीलें पेश कीं, लेकिन वे अदालत को संतुष्ट नहीं कर पाए।
अदालत ने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि आरोपी पति सुरेंद्र ही इस हत्या का मुख्य जिम्मेदार है। इसके आधार पर उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई। साथ ही, अन्य दो आरोपियों को भी दोषी मानते हुए उन्हें अलग-अलग सजा दी गई।
इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली। परिवार का कहना है कि उन्होंने अपनी बेटी को खो दिया, जिसकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकती, लेकिन अदालत के इस फैसले से उन्हें न्याय मिलने का एहसास हुआ है। उन्होंने न्यायपालिका और पुलिस का धन्यवाद किया, जिन्होंने इस मामले को गंभीरता से लिया।
यह घटना समाज में फैली दहेज प्रथा की कड़वी सच्चाई को उजागर करती है। आज भी कई महिलाएं इस कुरीति का शिकार हो रही हैं और कई मामलों में उन्हें अपनी जान तक गंवानी पड़ती है। यह मामला उन सभी लोगों के लिए एक चेतावनी है, जो दहेज के लालच में इंसानियत की सारी हदें पार कर देते हैं।
समाज को इस दिशा में जागरूक होने की जरूरत है। दहेज प्रथा को खत्म करने के लिए केवल कानून ही नहीं, बल्कि समाज की सोच में बदलाव भी जरूरी है। परिवारों को अपनी बेटियों के साथ होने वाले अत्याचार के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए और किसी भी स्थिति में ऐसे अपराधों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
सरकार द्वारा दहेज के खिलाफ बनाए गए कानूनों का सख्ती से पालन होना चाहिए, ताकि ऐसे मामलों में तेजी से न्याय मिल सके और अपराधियों में कानून का डर बना रहे।
अंततः, यह मामला यह दर्शाता है कि अगर पीड़ित परिवार हिम्मत और धैर्य के साथ न्याय की लड़ाई लड़ता है, तो उसे न्याय जरूर मिलता है। यह फैसला न केवल एक परिवार के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक सीख भी है कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना कितना जरूरी है।
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