गुरुग्राम। हरियाणा के गुरुग्राम जिले के आईएमटी मानेसर क्षेत्र में गुरुवार सुबह एक ऐसी वारदात हुई, जिसने पूरे इलाके में दहशत और सनसनी फैला दी। कासन गांव की शांत मानी जाने वाली गलियों में अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट गूंज उठी और कुछ ही पलों में एक व्यक्ति की जान चली गई। यह घटना केवल एक हत्या नहीं थी, बल्कि सालों पुरानी रंजिश और खून के बदले का ऐसा अध्याय था, जिसे एक बेटे ने अपने पिता की मौत का हिसाब चुकाने के लिए अंजाम दिया।

मृतक की पहचान 60 वर्षीय सुंदर फौजी के रूप में हुई है। सुंदर फौजी का नाम 2018 के उस चर्चित हत्याकांड से जुड़ा था, जिसमें कासन गांव के पूर्व सरपंच बहादुर की हत्या कर दी गई थी। उसी मामले में वह दोषी ठहराया गया था और जेल की सजा काट रहा था। हाल ही में उसे अपने बेटे की शादी में शामिल होने के लिए अदालत से पैरोल मिली थी, जिसके तहत वह कुछ दिनों के लिए जेल से बाहर आया हुआ था।
गांव में उसके घर पर शादी की तैयारियां चल रही थीं। परिवार में माहौल खुशी का था, लेकिन इस खुशी के बीच पुरानी दुश्मनी की परछाई अभी भी मंडरा रही थी। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह पैरोल उसकी जिंदगी का आखिरी मौका साबित होने वाला है।
घटना वाले दिन सुबह लगभग साढ़े आठ बजे सुंदर फौजी अपने घर के पास स्थित पहाड़ी क्षेत्र की ओर टहलने गया था। कुछ देर बाद वह वापस लौटा और कासन गांव के चौहान बूट हाउस के पास बैठ गया। आम दिन की तरह सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन इसी सामान्यता के बीच एक खतरनाक साजिश चुपचाप तैयार हो चुकी थी।
कुछ ही मिनटों बाद दो युवक बाइक पर वहां पहुंचे। बताया जाता है कि दोनों हमलावर पहले से इलाके की रेकी कर चुके थे और उन्हें पूरी जानकारी थी कि सुंदर फौजी कहां मौजूद है। बाइक रुकते ही एक हमलावर ने पिस्टल निकाली और बिना किसी चेतावनी के फायरिंग शुरू कर दी। एक के बाद एक गोलियां चलती गईं और पूरा इलाका गोलियों की आवाज से गूंज उठा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने बेहद करीब से निशाना साधा और 15 से अधिक गोलियां चलाईं। अचानक हुए इस हमले से किसी को संभलने का मौका नहीं मिला। सुंदर फौजी मौके पर ही गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़ा। आसपास मौजूद लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। कुछ ही पलों में हमलावर हथियार लहराते हुए बाइक पर फरार हो गए।
घटना की सूचना मिलते ही आईएमटी मानेसर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने इलाके को घेरकर जांच शुरू की और फॉरेंसिक टीम तथा डॉग स्क्वायड को भी बुलाया गया। घटनास्थल से कई खाली कारतूस बरामद किए गए, जिन्हें जांच के लिए भेज दिया गया है। पूरे क्षेत्र को कुछ समय के लिए सील कर दिया गया।
प्रारंभिक जांच में पुलिस को यह स्पष्ट संकेत मिले कि यह हत्या कोई सामान्य अपराध नहीं, बल्कि एक सोची-समझी बदले की कार्रवाई थी। जांच के दौरान सामने आया कि इस वारदात में पूर्व सरपंच बहादुर का बेटा मुख्य भूमिका में हो सकता है। शक है कि उसी ने अपने पिता की हत्या का बदला लेने के लिए इस हमले की योजना बनाई।
इस पूरे मामले की जड़ें साल 2018 में हुए उस हत्याकांड से जुड़ी हैं, जिसने कासन गांव को हिला दिया था। उस समय सुंदर फौजी और पूर्व सरपंच बहादुर कभी करीबी दोस्त हुआ करते थे, लेकिन बाद में पैसों के लेनदेन और निजी विवादों के चलते दोनों के बीच गहरी दुश्मनी हो गई थी। यह दुश्मनी इतनी बढ़ गई कि बहादुर की हत्या कर दी गई और मामले में सुंदर फौजी को दोषी ठहराया गया।
उस घटना के बाद दोनों परिवारों के बीच रंजिश लगातार बढ़ती रही। अदालत ने सुंदर फौजी को सजा सुनाई, लेकिन दूसरी तरफ मृतक परिवार के भीतर बदले की भावना धीरे-धीरे गहरी होती गई। समय बीतने के बावजूद यह घाव भरा नहीं, बल्कि और गहरा होता चला गया।
हाल ही में जब सुंदर फौजी को बेटे की शादी के लिए पैरोल मिली, तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह मौका उसके लिए जानलेवा साबित हो सकता है। पुलिस का मानना है कि हमलावरों ने इस मौके को जानबूझकर चुना, क्योंकि वह परिवारिक माहौल में ज्यादा सावधानी नहीं बरत रहा होगा।
वारदात के बाद पूरे कासन गांव और आसपास के इलाके में डर और तनाव का माहौल बन गया। दिनदहाड़े हुई इस गोलीबारी ने लोगों को झकझोर कर रख दिया। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पहले कभी इस तरह खुलेआम और बेरहमी से हत्या नहीं देखी।
पुलिस ने तुरंत आसपास के सीसीटीवी कैमरों की जांच शुरू कर दी है और संदिग्धों की पहचान के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि हमलावरों की पहचान जल्द ही कर ली जाएगी और उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा।
फिलहाल पुलिस इस मामले को कई एंगल से जांच रही है—क्या यह सिर्फ व्यक्तिगत बदला था या इसके पीछे किसी बड़ी साजिश की भूमिका भी है। सभी पहलुओं की गहराई से जांच की जा रही है।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पुरानी रंजिशें समय के साथ खत्म क्यों नहीं होतीं और कैसे बदले की आग पीढ़ियों तक जलती रहती है। मानेसर की यह वारदात उसी कड़वी सच्चाई की एक और भयावह मिसाल बनकर सामने आई है।
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