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पंचायत सचिवों ने मुख्य विकास अधिकारी पर दबाव बनाने के लिए उतरे मैदान में

चकरनगर (इटावा, डॉ एस एस बी चौहान) 16 अक्टूबर ।

इटावा के पंचायत सचिवों द्वारा जनपद के ईमानदार मुख्य विकास अधिकारी के खिलाफ लामबंद होकर आलोचना करने की बात कुछ हजम नहीं हो रही है मुख्य विकास अधिकारी पंचायत सचिवों के भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की मंशा जाहिर की तो जिले भर के सचिव ईमानदारी की दुहाई देकर लामबंद हो गए। मामला इन पंचायत सचिवों के काले कारनामों का कच्चा चिट्ठा है।

कौंन नही जानता सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार फैलाने का श्रेय यदि किसी एक कर्मचारी को जाता है तो वह पंचायत सेक्रेटरी ही है जिसने विकास कार्य के समस्त कार्यों को पूरी तरह पलीता लगा दिया है और ईमानदार मुख्य विकास अधिकारी ने उनके भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना चाहा तो सारे कर्मचारी एक साथ इकट्ठा होकर भ्रष्ट पंचायत सचिव अपने भ्रष्टाचार की कलई खुलने के डर से लामबंद होकर एक ईमानदार अधिकारी को ही कटघरे में खड़ा करने का प्रयास करने लगे। पहले शौचालय योजना को ही लें जिसमें इन पंचायत सचिवों ने ₹12000 के स्थान पर 7000 से 8000 से ज्यादा रुपए किसी को नहीं दिए बिचारे लाभार्थियों ने इसलिए विरोध नहीं किया कि कहीं ना कहीं उनके नाम का शौचालय किसी और को ना दे दिया जाए और उनका नाम काट दिया जाएगा ।

दूसरा घोटाला आवास योजना का भी जिक्र करना लाजमी है सरकार द्वारा 120000 रुपए प्रति लाभार्थी का दिया जाना था उसमें इन पंचायत सचिवों ने खुल्लम-खुल्ला 20,000 से 35000 तक की कटौती पहले ही कर ली इस देश में मुफ्त खोरी तेजी से बढ़ रही है ₹30000 देने पर यदि ₹120000 मिल जाते हैं तो क्या बुरा है।

सरकार को चाहिए कि वह अपनी खुफिया एजेंसी से इन तथ्यों की जांच कराएं की लाभार्थियों को वास्तव में कितना धन मिल पाता है ग्राम विकास अधिकारी सचिव भ्रष्टाचार में पूर्णतया डूबे हुए हैं। यदि कोई पत्रकार या नेता इनके भ्रष्टाचार को उजागर करता है तो हरिजन सचिव उस पत्रकार या नेता को जातिसूचक बता कर जेल भिजवाने की भी धमकी देते हैं वहीं स्कूलों की बाउंड्री हो आलम ये है कि उनमें 50 परसेंट विद्यालयों में पुरानी ईट से निर्माण कार्य कराया गया है साथ ही मनरेगा के तहत भी सचिवों का मनमाना रवैया देखने को मिलता है बताया जाता है 20 परसेंट से 40 परसेंट रुपए प्रधान व सचिव को देने से काम करो या ना करो भुगतान बराबर आपके खाते में भेजा जाता है इन सचिवों ने तो बेशर्मी की सभी हदें पार कर दी हैं अब वह चोरी और सीनाजोरी पर भी उतर आए ।

सत्य बहुत कड़वा होता है सत्य तो यह है कि सरकार ग्राम विकास के चाहे जितने प्रयास करें इन पंचायत सचिवों के रहते यह एक स्वप्न से ज्यादा कुछ नहीं है सरकार की हर योजना में इन सचिवों को पहले भ्रष्टाचार का धन उगाही की योजना ही दिखाई देती है ऐसा ही नहीं है कि सभी सचिव भ्रष्ट हो परंतु इतना निश्चित है कि इनकी संख्या 80 से 90% तक है और आश्चर्य तो तब होता है कि इनकी अगुवाई एक जगह भ्रष्ट सचिव करें।

उत्तर प्रदेश सरकार को चाहिए कि वह मुख्य विकास अधिकारी पर कोई कार्यवाही करने से पहले पंचायत सचिवों द्वारा ग्रामों में किए गए विकास कार्यों की पहले किसी तकनीकी अधिकारी से जांच कराएं तथा दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दें ताकि सरकार का ग्राम विकास का सपना पूरा हो सके अन्यथा इन भ्रष्ट सचिवों के रहते ग्राम विकास का सपना सपना ही रहेगा साथ ही सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि भ्रष्ट कर्मचारियों के खिलाफ आवाज उठाने वालों पर कोई मुकदमा ना लिखा जाए साथ ही इनके भ्रष्ट इतिहास को उजागर किया जाए और पंचायतों में होने वाली लूट को उजागर किया जाए साथ ही जिलाधिकारी को चाहिए कि वह भ्रष्टाचारियों को एक ईमानदार सीडीओ पर हावी ना होने दें और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई जारी रखें। जिला इटावा में समस्त ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों की जांच की मांग ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन उत्तर प्रदेश की इकाई इटावा के जिला अध्यक्ष स्वामी शरण श्रीवास्तव ,कोषाअध्यक्ष सोम हरि अवस्थी ,सचिव तरुण त्रिपाठी, महामंत्री राकेश सिंह राठौर, मंत्री दीपक चौहान, तेजेश्वर राव चौबे, जितेंद्र त्रिपाठी ,अनूप तिवारी, सहित जिले के ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के समस्त पदाधिकारियों ने मांग की है कि प्रदेश सरकार इन भ्रष्ट सचिवों के खिलाफ निष्पक्ष जांच कराकर उचित कार्रवाई करें और ईमानदार सीडीओ पर लगने वाले बिना वजह आरोपों को भी भ्रष्ट सचिवों को वापस लिया जाए।

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