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बैंक हड़ताल के बावजूद सेवाएं जारी रखने की तैयारी, ग्राहकों को राहत देने पर सरकार का जोर

मंगलवार को देशभर के बैंकों में यूनियन की ओर से घोषित हड़ताल के चलते बैंकिंग व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका जरूर है, लेकिन सरकार और बैंक प्रबंधन ने साफ कर दिया है कि आम ग्राहकों को अधिक परेशानी न हो, इसके लिए हर संभव कदम उठाए गए हैं। भले ही कुछ शाखाओं में कामकाज आंशिक रूप से प्रभावित हो, लेकिन एटीएम, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई और अन्य डिजिटल सेवाएं सामान्य रूप से चालू रहेंगी।

बैंक यूनियनों की हड़ताल की घोषणा के बाद सोमवार को एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें यह तय किया गया कि हड़ताल के दौरान भी आवश्यक बैंकिंग सेवाएं सुचारु रूप से चलती रहें। यह बैठक वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव की अध्यक्षता में हुई, जिसमें भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के चेयरमैन, सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ, साथ ही इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए।

ग्राहकों को केंद्र में रखकर लिए गए फैसले

बैठक में बैंकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि किसी भी हाल में ग्राहक सेवाओं में रुकावट नहीं आनी चाहिए। खास तौर पर इस बात पर जोर दिया गया कि डिजिटल बैंकिंग प्लेटफॉर्म पूरी क्षमता के साथ काम करें। इसमें इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल ऐप्स, यूपीआई ट्रांजैक्शन, डेबिट-क्रेडिट कार्ड भुगतान, ऑनलाइन फंड ट्रांसफर और अन्य डिजिटल माध्यम शामिल हैं।

इसके अलावा, चेक क्लीयरिंग और सेटलमेंट सिस्टम को भी प्रभावित न होने देने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि व्यापारिक गतिविधियां और सरकारी लेन-देन बिना किसी अड़चन के चलते रहें। सरकार से जुड़ी बैंकिंग सेवाओं, जैसे सब्सिडी, पेंशन, सरकारी भुगतान और टैक्स से संबंधित ट्रांजैक्शन को भी प्राथमिकता देने को कहा गया है।

एटीएम में नकदी की कोई कमी नहीं

सूत्रों के अनुसार, बैंकों ने सरकार को भरोसा दिलाया है कि देशभर के एटीएम में पर्याप्त नकदी पहले से ही डाली जा चुकी है। इसके साथ ही यह व्यवस्था भी की गई है कि यदि किसी क्षेत्र में नकदी की मांग बढ़ती है, तो समय पर दोबारा कैश रीफिल किया जाएगा। बैंकों का कहना है कि हड़ताल के कारण एटीएम से नकदी निकालने में ग्राहकों को किसी तरह की बड़ी समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।

ग्रामीण और दूरदराज इलाकों को ध्यान में रखते हुए बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट (BC) के माध्यम से बैंकिंग सेवाएं जारी रखने के भी निर्देश दिए गए हैं। इससे उन इलाकों में रहने वाले लोगों को राहत मिलेगी, जहां बैंक शाखाओं की संख्या सीमित है।

शाखाओं में कामकाज पर पड़ सकता है असर

हालांकि यह भी स्वीकार किया गया है कि हड़ताल के चलते कई बैंक कर्मचारी और अधिकारी काम पर नहीं आएंगे, जिससे शाखाओं में सामान्य कामकाज पर असर पड़ सकता है। नकद जमा, पासबुक एंट्री, ड्राफ्ट बनवाने या अन्य काउंटर से जुड़ी सेवाओं में देरी हो सकती है। लेकिन बैंक प्रबंधन का कहना है कि इसका असर सीमित रहेगा और जरूरी सेवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

डिजिटल सेवाओं को लेकर बैंकों ने यह भी साफ किया है कि तकनीकी टीम पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहेगी, ताकि किसी भी तरह की तकनीकी खराबी को तुरंत ठीक किया जा सके। यूपीआई, कार्ड पेमेंट और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन को लेकर अतिरिक्त निगरानी रखी जाएगी।

हड़ताल की वजह और यूनियनों की मांग

यह हड़ताल यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) के आह्वान पर की जा रही है। यूएफबीयू नौ प्रमुख बैंक यूनियनों और संगठनों का संयुक्त मंच है। यूनियनों की सबसे बड़ी मांग बैंकों में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने की है, यानी शनिवार और रविवार दोनों को साप्ताहिक अवकाश दिया जाए।

यूनियनों का कहना है कि लंबे समय से इस मांग को लेकर बातचीत चल रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय या समय-सीमा तय नहीं की गई। ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन के मुताबिक, 22 और 23 जनवरी को वित्तीय सेवा विभाग के साथ चर्चा हुई थी, लेकिन उसमें भी किसी नतीजे पर सहमति नहीं बन सकी। इसी वजह से यूनियनों ने हड़ताल का फैसला बरकरार रखा है।

सरकार और बैंकों की अपील

सरकार और बैंक प्रबंधन दोनों ने ग्राहकों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और अनावश्यक रूप से शाखाओं में भीड़ न लगाएं। डिजिटल माध्यमों का अधिक से अधिक उपयोग करें और जरूरी काम पहले से ऑनलाइन निपटा लें। बैंकों का कहना है कि यह हड़ताल अस्थायी है और इसका उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना है।

आम जनता के लिए क्या जरूरी है?

ग्राहकों के लिए सबसे अहम बात यह है कि वे अपनी बैंकिंग जरूरतों की योजना पहले से बना लें। यदि शाखा से जुड़ा कोई जरूरी काम है, तो संभव हो तो उसे हड़ताल के बाद के लिए टालें। वहीं, रोजमर्रा के लेन-देन के लिए यूपीआई, कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल करें।

कुल मिलाकर, बैंक हड़ताल के बावजूद सरकार और बैंकों की कोशिश यही है कि देश की बैंकिंग व्यवस्था पर इसका असर न्यूनतम रहे और आम लोगों की जिंदगी पर इसका बोझ न पड़े। डिजिटल बैंकिंग के दौर में यह हड़ताल भी एक परीक्षा है, जिसमें बैंकों ने भरोसा दिलाया है कि वे ग्राहकों को अकेला नहीं छोड़ेंगे

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