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राष्ट्रपति भवन में शाही दावत से गर्माई कूटनीति: लूला के सम्मान में जुटे देश के शीर्ष नेता, भारत-ब्राजील रिश्तों पर बड़े संकेत

नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन शनिवार रात उस समय अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का केंद्र बन गया, जब भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा के सम्मान में भव्य राजकीय दावत का आयोजन किया। इस शाही कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।

राजकीय भोज केवल औपचारिक स्वागत नहीं था, बल्कि यह भारत और ब्राजील के बीच तेजी से मजबूत हो रहे रिश्तों का प्रतीक भी बन गया। दोनों देशों के नेताओं ने मंच से जो संदेश दिए, वे आने वाले वर्षों में आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी सहयोग की दिशा तय करने वाले संकेत माने जा रहे हैं।

शिक्षा से बदलती है किस्मत — लूला का खास संदेश

भोज के दौरान ब्राजीलियाई राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में शिक्षा को राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने राष्ट्रपति मुर्मू की यात्रा और जीवन संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी देश की तकदीर बदलने का सबसे सशक्त साधन शिक्षा में निवेश है।

उनके शब्दों ने वहां मौजूद मेहमानों को भावुक कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की सामाजिक विविधता और लोकतांत्रिक मजबूती विश्व के लिए उदाहरण है। उनके बयान को भारत-ब्राजील साझेदारी को भावनात्मक आधार देने वाला संदेश माना जा रहा है।

राष्ट्रपति मुर्मू का संदेश — “सच्चे मित्र का स्वागत”

राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि भारत में लूला का आगमन केवल राजकीय दौरा नहीं, बल्कि दो मित्र देशों के रिश्तों को और गहरा करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि हर यात्रा के साथ दोनों देशों की दोस्ती मजबूत होती गई है और आने वाले समय में यह साझेदारी और भी व्यापक होगी।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत और ब्राजील के संबंध अब केवल राजनीतिक नहीं रहे, बल्कि व्यापार, विज्ञान, रक्षा और डिजिटल सहयोग तक फैल चुके हैं।

व्यापार, रक्षा और टेक्नोलॉजी में नए आयाम

राष्ट्रपति ने स्पष्ट कहा कि भारत और ब्राजील की रणनीतिक साझेदारी कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रही है —

व्यापार और निवेश

रक्षा सहयोग

तेल और गैस

जैव ईंधन

कृषि व पशुधन

स्वास्थ्य सेवा

अंतरिक्ष और विज्ञान

डिजिटल तकनीक

साइबर सुरक्षा

उन्होंने यह भी बताया कि लैटिन अमेरिका में ब्राजील भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच व्यापार को कई गुना बढ़ाने की क्षमता मौजूद है।

कृषि सहयोग पर विशेष जोर

कार्यक्रम के दौरान कृषि क्षेत्र को सहयोग का नया आधार बताया गया। नेताओं ने माना कि फसल उत्पादन, सिंचाई तकनीक, पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट और जैव-प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में साझा अनुसंधान दोनों देशों के किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सहयोग सही दिशा में आगे बढ़ा, तो भारत और ब्राजील वैश्विक खाद्य सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

वैश्विक मंचों पर साझा रणनीति

दोनों देशों के बीच सहयोग केवल द्विपक्षीय नहीं, बल्कि वैश्विक मंचों पर भी मजबूत हो रहा है। लूला की भारत यात्रा ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने की चर्चा तेज है।

भारत ने ब्राजील की सफल मेजबानी वाले BRICS और COP-30 सम्मेलनों की सराहना की। इससे स्पष्ट है कि दोनों देश वैश्विक आर्थिक व्यवस्था और जलवायु नीति पर मिलकर काम करना चाहते हैं।

व्यापार समझौते और नई संभावनाएं

भारत ने दक्षिण अमेरिकी व्यापार समूह Mercosur के साथ अपने व्यापार समझौते को विस्तार देने की इच्छा भी जताई। यह संकेत है कि भारत-ब्राजील संबंध आने वाले समय में क्षेत्रीय व्यापार ढांचे को प्रभावित कर सकते हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह समझौता मजबूत हुआ, तो भारत को दक्षिण अमेरिकी बाजारों में बड़ी पहुंच मिलेगी और ब्राजील को एशियाई बाजारों में नई संभावनाएं मिलेंगी।

पांचवीं बार भारत आए लूला

ब्राजील के राष्ट्रपति के रूप में लूला की यह पांचवीं भारत यात्रा है। वे 18 फरवरी को भारत पहुंचे और एआई से जुड़े वैश्विक सम्मेलन में भाग लिया।

उनकी यह यात्रा प्रधानमंत्री मोदी की 2025 में ब्राजील यात्रा के कुछ महीनों बाद हो रही है, जिसे कूटनीतिक रूप से रिश्तों की निरंतरता का संकेत माना जा रहा है।

रिश्तों का नया अध्याय?

राष्ट्रपति भवन की इस भव्य दावत को केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत-ब्राजील संबंधों के नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि दोनों देश आर्थिक सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य उत्पादन और तकनीकी साझेदारी में मिलकर काम करते हैं तो वैश्विक शक्ति संतुलन में उनकी भूमिका और मजबूत हो सकती है।

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