भीषण गर्मी से जूझ रहे देशवासियों को अचानक मौसम ने बड़ी राहत दी है। उत्तर से दक्षिण और पश्चिम से पूर्व तक मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आ रहा है। कई राज्यों में तेज हवाओं, गरज-चमक और बारिश ने तापमान को नीचे ला दिया है, जिससे लोगों को झुलसाने वाली गर्मी से राहत मिली है। हालांकि, इस राहत के साथ कई जगहों पर तूफान, बिजली गिरने और बारिश से जुड़े हादसों ने चिंता भी बढ़ा दी है।

मौसम विज्ञानियों के अनुसार, इस बदलाव की मुख्य वजह सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ है, जिसने पूरे उत्तरी भारत और हिमालयी क्षेत्रों के मौसम को प्रभावित किया है। इसके असर से आने वाले चार से पांच दिनों तक बारिश, तेज हवाएं और कुछ इलाकों में ओलावृष्टि की संभावना बनी हुई है। यही कारण है कि पिछले कुछ दिनों से तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।
हिमालयी इलाकों में ठंड की वापसी
पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में मौसम का असर सबसे अधिक देखने को मिला है। जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के ऊंचे इलाकों में बर्फबारी ने एक बार फिर सर्दी का अहसास करा दिया है। रोहतांग दर्रा, कुंजम दर्रा और अन्य ऊंची चोटियों पर बर्फ गिरने से तापमान में तेज गिरावट आई है।
हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और बर्फबारी के कारण मौसम सुहावना हो गया है। शिमला, मनाली, कुल्लू और चंबा जैसे क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। पांगी क्षेत्र की ऊंची चोटियों पर ताजा बर्फबारी ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों दोनों को आकर्षित किया। हालांकि, इससे ठंड बढ़ने के साथ-साथ यातायात और दैनिक जीवन पर भी असर पड़ा है।
जम्मू-कश्मीर में बदला मौसम, मार्ग बंद
जम्मू-कश्मीर में भी मौसम ने अचानक करवट ली है। श्रीनगर सहित कई इलाकों में बादल छाए रहे और रुक-रुककर बारिश होती रही। तापमान सामान्य से काफी नीचे चला गया, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली।
किश्तवाड़ जिले के सिंथन टॉप पर हुई बर्फबारी के कारण किश्तवाड़-अनंतनाग मार्ग को बंद करना पड़ा। सड़क पर फिसलन बढ़ने के कारण प्रशासन ने एहतियातन यह फैसला लिया। अधिकारियों ने लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम की जानकारी लेकर ही सफर करने की सलाह दी है।
मैदानी इलाकों में आंधी और तेज हवाएं
उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में भी मौसम ने तेजी से बदलाव दिखाया है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तेज आंधी के साथ बारिश हुई। कई जगहों पर हवा की रफ्तार 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई, जिससे पेड़ उखड़ने और बिजली आपूर्ति बाधित होने की घटनाएं सामने आईं।
दिल्ली-एनसीआर में हुई बारिश ने तापमान को काफी नीचे ला दिया और लोगों को गर्मी से राहत मिली। हालांकि, तेज हवाओं के कारण ट्रैफिक और जनजीवन कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ।
पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में भारी बारिश
पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश का दौर और भी ज्यादा तीव्र रहा। असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश में भारी वर्षा दर्ज की गई। मिजोरम के कई जिलों में हालात ऐसे बन गए कि प्रशासन को स्कूल बंद करने पड़े।
उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी अत्यधिक वर्षा हुई, जहां कुछ इलाकों में 20 सेंटीमीटर से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई। इससे नदियों का जलस्तर बढ़ गया और भूस्खलन का खतरा भी मंडराने लगा है।
बारिश से राहत, लेकिन हादसों का कहर
जहां बारिश ने लोगों को गर्मी से राहत दी, वहीं इससे जुड़े हादसों ने कई परिवारों को दुख भी दिया है। उत्तर प्रदेश में आंधी और बारिश के दौरान हुए हादसों में 18 लोगों की मौत हो गई। इनमें सुल्तानपुर, अमेठी और अयोध्या जिलों में सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र रहे।
झारखंड के गिरिडीह में बिजली गिरने से दो लोगों की जान चली गई और कई अन्य घायल हो गए। इन घटनाओं ने यह साफ कर दिया कि मौसम का यह बदला रूप जितना राहत देता है, उतना ही खतरनाक भी हो सकता है।
दक्षिण भारत में भी असर, बेंगलुरु में बड़ा हादसा
मौसम का असर दक्षिण भारत में भी देखने को मिला है। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में भारी बारिश के बीच एक दर्दनाक हादसा हुआ। एक अस्पताल परिसर की दीवार गिरने से सात लोगों की मौत हो गई, जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं।
बताया गया कि तेज बारिश और आंधी के दौरान कुछ लोग दीवार के पास खड़े थे, तभी दीवार अचानक ढह गई और लोग मलबे में दब गए। राहत और बचाव दल ने तुरंत मौके पर पहुंचकर घायलों को बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। राज्य सरकार ने मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने और घायलों के मुफ्त इलाज की घोषणा की है।
तापमान में भारी गिरावट
मौसम में आए इस बदलाव का सबसे बड़ा असर तापमान पर पड़ा है। हिमाचल प्रदेश और आसपास के इलाकों में तापमान में करीब 10 डिग्री तक की गिरावट दर्ज की गई है। जहां कुछ दिन पहले पारा 40 डिग्री के करीब पहुंच गया था, वहीं अब यह घटकर 30-35 डिग्री के बीच आ गया है।
उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में भी तापमान में कमी आई है, जिससे लोगों को काफी राहत मिली है। हालांकि, मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि यह राहत अस्थायी हो सकती है और आगे भी मौसम में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा।
आने वाले दिनों का पूर्वानुमान
मौसम विभाग के अनुसार, अगले चार से पांच दिनों तक देश के कई हिस्सों में बारिश, आंधी और तेज हवाओं का दौर जारी रहेगा। खासकर हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी और भूस्खलन का खतरा बना रहेगा।
मैदानी इलाकों में भी गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने और मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है।
सावधानी ही बचाव
इस तरह के मौसम में सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। तेज आंधी के दौरान खुले स्थानों पर खड़े होने से बचना चाहिए, बिजली गिरने के खतरे के समय सुरक्षित स्थान पर रहना चाहिए और अनावश्यक यात्रा से बचना चाहिए। पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।
निष्कर्ष
देशभर में मौसम का यह बदला मिजाज एक ओर जहां भीषण गर्मी से राहत लेकर आया है, वहीं दूसरी ओर इसने कई चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं। बारिश और बर्फबारी ने लोगों को सुकून जरूर दिया है, लेकिन इससे जुड़े हादसे यह याद दिलाते हैं कि प्राकृतिक बदलाव हमेशा आसान नहीं होते।
ऐसे में जरूरी है कि लोग मौसम के साथ तालमेल बिठाते हुए सतर्क रहें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। तभी इस राहत का आनंद सुरक्षित तरीके से लिया जा सकता है।
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