हरियाणा के Ambala कैंट के नागरिक अस्पताल में गुरुवार दोपहर एक गंभीर और चिंताजनक घटना सामने आई, जिसने स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इमरजेंसी वार्ड में एक मरीज ने अचानक आक्रामक व्यवहार करते हुए महिला डॉक्टर के साथ अभद्रता की और बीचबचाव करने आए सुरक्षा गार्ड पर केमिकल से हमला कर दिया। इस घटना से अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब अस्पताल की इमरजेंसी में सामान्य रूप से मरीजों का इलाज चल रहा था। ड्यूटी पर मौजूद महिला डॉक्टर Dr Riddhi अन्य मरीजों को देख रही थीं। इसी दौरान पंजाबी बाग निवासी राजेश नामक व्यक्ति एमएलसी (मेडिको-लीगल केस) बनवाने के लिए अस्पताल पहुंचा।
शुरुआत में वह सामान्य दिखाई दे रहा था, लेकिन कुछ ही देर बाद उसका व्यवहार अचानक बदल गया। उसने बिना किसी स्पष्ट कारण के गाली-गलौज शुरू कर दी और अस्पताल स्टाफ से बदतमीजी करने लगा। डॉक्टर रिद्धि ने बताया कि उन्होंने उसे शांत रहने और अपनी बारी का इंतजार करने के लिए कहा, लेकिन वह और अधिक उग्र हो गया।
स्थिति को बिगड़ता देख सुरक्षा गार्ड जसप्रीत सिंह मौके पर पहुंचे और आरोपी को समझाने की कोशिश की। उन्होंने उसे इमरजेंसी वार्ड से बाहर ले जाकर शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन आरोपी ने गार्ड के साथ भी हाथापाई शुरू कर दी। गार्ड ने जब उसे रोकने की कोशिश की, तो उसने हिंसक रूप ले लिया।
इसी दौरान आरोपी ने महिला डॉक्टर के साथ भी अभद्र व्यवहार किया और उनका हाथ पकड़ लिया, जिससे वहां मौजूद स्टाफ और मरीजों में भय का माहौल बन गया। यह घटना कुछ ही पलों में गंभीर रूप लेती चली गई और इमरजेंसी वार्ड में अफरा-तफरी फैल गई।
हंगामे के बीच आरोपी ने पास में रखी फर्श साफ करने वाली फिनाइलनुमा केमिकल की बोतल उठा ली और गार्ड जसप्रीत सिंह पर फेंक दी। केमिकल गार्ड के चेहरे और आंखों पर गिरा, जिससे उन्हें तेज जलन और दर्द होने लगा। वे वहीं बैठकर कराहने लगे और अन्य स्टाफ ने तुरंत उनकी मदद की।
इस घटना के दौरान अस्पताल में मौजूद मरीज और उनके परिजन भी घबरा गए। कई लोग वहां से दूर हटने लगे और कुछ ने घटना का वीडियो भी बना लिया। इमरजेंसी जैसी संवेदनशील जगह पर इस तरह का हंगामा सभी के लिए डरावना अनुभव रहा।
घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और आरोपी को काबू में लेकर हिरासत में ले लिया। उसे रेजिमेंट चौकी ले जाया गया, जहां उससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने इस तरह का व्यवहार क्यों किया।
अस्पताल स्टाफ के अनुसार, आरोपी करीब 15 से 20 मिनट तक लगातार हंगामा करता रहा। इस दौरान उसने न केवल डॉक्टर और गार्ड के साथ बदसलूकी की, बल्कि पूरे अस्पताल का माहौल भी बिगाड़ दिया। स्टाफ का कहना है कि यदि समय रहते उसे काबू नहीं किया जाता, तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।
इस घटना के बाद अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों में रोष देखने को मिला। उनका कहना है कि वे दिन-रात मरीजों की सेवा में लगे रहते हैं, लेकिन इस तरह की घटनाएं उनके मनोबल को कमजोर करती हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पताल जैसे स्थानों पर सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण होती है। इमरजेंसी वार्ड में अक्सर तनावपूर्ण स्थितियां बनती हैं, ऐसे में वहां पर्याप्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और निगरानी जरूरी है। इसके अलावा, स्टाफ को भी ऐसे हालात से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया जाएगा। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या आरोपी नशे में था या किसी मानसिक दबाव में था, जिसके कारण उसने इस तरह का व्यवहार किया।
यह घटना एक बार फिर यह सवाल उठाती है कि क्या हमारे स्वास्थ्यकर्मी सुरक्षित हैं? देशभर में समय-समय पर डॉक्टरों और नर्सों के साथ हिंसा की घटनाएं सामने आती रहती हैं। ऐसे में जरूरी है कि सरकार और प्रशासन इस दिशा में ठोस कदम उठाएं।
अंततः, अंबाला के इस अस्पताल में हुई घटना केवल एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि यह एक चेतावनी है कि स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं।
समाज के हर व्यक्ति को यह समझना होगा कि अस्पताल सेवा का स्थान है, जहां शांति और सहयोग जरूरी है। इस तरह की घटनाएं न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करती हैं, बल्कि समाज में असुरक्षा की भावना भी पैदा करती हैं।
अब सभी की नजरें पुलिस जांच पर टिकी हैं कि आरोपी के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है और क्या इस घटना के बाद अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था में कोई ठोस सुधार किया जाता है।
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