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चेतना रंग उत्सव में रंगकर्मी व नाट्य लेखक समीर सम्मानित, बधाईयों का लगा तांता

रंगकर्मी सह नाट्य लेखक समीर चेतना रंग उत्सव में किये गये सम्मानित

घेघौंज नाटक के लेखन एवं मंचन के लिए चेतना समिति द्वारा सम्मानित किये जाने पर नाट्य प्रेमियों ने जताया हर्ष

झंझारपुर मधुबनी(डॉ. संजीव शमा) : अनुमंडल क्षेत्र के रतुपार गांव निवासी जाने – माने रंगकर्मी सह नाटककार समीर कुमार को बीते दिनों चेतना समिति पटना द्वारा आयोजित चेतना रंग उत्सव -2019 में नाटक ‘घेघौंज’ के लिए राजधानी स्थित कालिदास रंगालय में समिति के अध्यक्ष विवेकानंद झा एवं सचिव उमेश मिश्र ने सहभागिता सम्मान-पत्र देकर सम्मानित किया। बताते चलें कि कालिदास रंगालय में चेतना रंग उत्सव के पांचवे दिन नाटककार श्री कुमार लिखित मैथिली नाटक घेघौंज का मिथिला संस्कृति एवं कला मंच के दर्जनों कलाकारों ने प्रसिद्ध निर्देशक नीतेश कुमार के निर्देशन में सफल मंचन कर कीर्तिमान स्थापित करने में सफलता अर्जित की । घेघौंज शीर्षक के संबंध में नाटक के लेखक समीर कुमार ने बताया कि इसका अर्थ ‘कउआ झामर’ से है जिसका अर्थ है बोलता हर कोई है, मगर कोई किसी का सुनता नहीं । नाटक की खास बातों के बारे में श्री कुमार ने प्रेस को बताया कि इस नाटक में गांव की राजनीति में हो रहे जनप्रतिनिधियों की करतूतों को हास्य व्यंग्य के जरिये पेश किया गया है।

चेतना समिति के अध्यक्ष से सम्मान पत्र ग्रहण करते घेघौंज के लेखक समीर

यमराज और चित्रगुप्त के संवाद को बड़े ही रोचक ढंग से पेश किया गया है जिसे सुनकर दर्शक लुत्फ उठाते नहीं थकते । नाटक में गांव की राजनीति की चुनावी गणित को इस प्रकार रखा गया है कि यमराज और चित्रगुप्त भी देखकर चौंक जाते हैं । उन्होंने कहा कि नाटक का चयन समिति द्वारा किया जाना मेरे लिए गौरव की बात है ।प्रसन्नता जाहिर करते हुए रंगकर्मी सुमन शेखर आज़ाद ने कहा कि मैथिली के ऊर्जावान नाटककार समीर कुमार लगातार अपनी नाट्य रचनाओं से मैथिली की सेवा करते आ रहे हैं । इन्होंने अपनी नाटकों में ग्रामीण परिवेश में घटने वाली घटनाओं को सहज ढंग से उदधृत करने में सफलता हासिल किया है । नाटककार आनन्द कुमार झा ने श्री कुमार को सम्मानित किये जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इनकी रचनाओं में मौलिकता का भाव नजर आता है जो सहजता को समेटे हुए है ।सम्प्रति श्री कुमार अनुमंडल कार्यालय झंझारपुर में कार्यरत हैं साथ ही मैथिली साहित्य के नाट्य विधा में सदैव सृजनरत हैं।अपने पहले मंचन के विषय में श्री कुमार बताते हैं कि गांव में बाल नाट्यकला परिषद का गठन कर सर्वप्रथम हिन्दी नाटक भीष्म प्रतिज्ञा में सत्यवती के पिता की भूमिका में अभिनय किया था । वे आगे बताते हैं कि अनुमंडल क्षेत्र का लब्ध प्रतिष्ठित रंगमंच कला निकेतन के मंच पर अभिनय करना एक बड़ी बात थी । जहां मजे हुये कलाकार को ही स्थान मिल पाता।

फाइल फोटो : नाटक घेघौंज के लेखक समीर

ऐसे में स्वयं द्वारा स्थापित मंच से अभिनय की शुरुआत की । नाटक का सफल मंचन हुआ इस बात की जानकारी कला निकेतन के संस्थापक निर्देशक बृजेन्द्र कुमार कलाकार को जब हुई तो उन्होंने अपने रंगमंच से श्री कुमार को अपने निर्देशन में मंचन करने का मौका दिया । फिर कभी श्री कुमार को पीछे मुड़कर नहीं देखना पड़ा । कला निकेतन के सक्रिय कलाकार के रूप में निर्देशन नाटकों में हर तरह की भूमिका चाहे मुख्य नायक या फिर नायिका इसके अलावा भी अन्य भूमिका में अभिनय करने में दक्ष श्री कुमार रंगमंच की दुनिया में छा गये । हास्य कलाकार की भूमिका भी इन्होंने जानदार तरीके से कई नाटकों में की है। हिंदी हास्य नाटक रंगा बिल्ला में बिल्ला की भूमिका की चर्चा आज भी लोगों के जुबान पर है । बाद में श्री कुमार को कला निकेतन जैसे रंगमंच का निर्देशक बनने का अवसर भी प्राप्त हुआ। इन्होंने अपने निर्देशन में कई नाटकों का सफल मंचन कर रंगमंच की ख्याति दिलाने में अहम भूमिका निभाई है । लेखन के संबंध में इन्होंने बताया कि अभिनय से प्रेरित होकर नाटक लिखना शुरु किया। एक से बढ़कर एक नाटक की रचना की जिसमें ‘जुलुम भ गेलय’, ‘मिथिला दर्शन’, ‘बेटखौकी’, ‘खोनमा रहल फोकाइले’, ‘बौआ पछतेब’, ‘परजाइतक कनियाँ’आदि नाटक ने काफी प्रतिष्ठा अर्जित की है । इन नाटकों का शानदार मंचन मिथलांचल के कई मंच से किया गया। जिसमें बड़का गाम उजान,दरिमा,भच्छी, नवानी,अररिया संग्राम,हररी, अलपुरा, ननौर, चोरा महरैल आदि गांवों का नाम उल्लेखनीय है। मैथिली में नाट्य लेखन के लिए कई मंच से सम्मानित भी किये गये। चेतना समिति द्वारा सम्मानित किये जाने पर जिले के नाट्य प्रेमियों व साहित्यकारों में कुमार साहब,अजित आज़ाद, नाटककार आनंद कुमार झा, डॉ महेंद्र नारायण राम, प्रीतम निषाद, कुमार जितेंद्र, दिलीप कुमार झा,डॉ.अनिल ठाकुर, शंभु सौरभ,प्रो.शुभ कुमार वर्णवाल,अमरकांत लाल, मलयनाथ मण्डन,डॉ.सुरेश पासवान,पं.शिव कुमार मिश्र, जगदीश प्रसाद मंडल,बीरेंद्र नारायण झा,काशीनाथ झा किरण,अनु अंजना,कुमकुम झा,डॉ कन्हैया झा,डॉ.दीपक कुमार सिंह आदि ने हर्ष जताते हुए शुभकामनाऐं व बधाई दी है ।

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