मधुबनी/रायपुर। बीते रविवार 15 मार्च को मधुबनी जिले के झंझारपुर अनुमंडल अंतर्गत अंधराठाढ़ी प्रखंड के ठाढ़ी गांव में कला एवं संस्कृति विभाग, जिला प्रशासन एवं भामती वाचस्पति स्मारक निर्माण समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भामती-वाचस्पति महोत्सव 2026 के दौरान मंच से दिए गए एक वक्तव्य पर विवाद खड़ा हो गया है।

महोत्सव के मंच से कुछ वक्ताओं द्वारा वाचस्पति मिश्र के जन्मस्थान अथवा कार्यस्थल को लेकर “विद्वानों में मंथन जारी” होने की बात कही गई, जिसे विभिन्न समाचार पत्रों में भी प्रकाशित किया गया। इस कथन पर आपत्ति जताते हुए अंधराठाढ़ी निवासी एवं वर्तमान में छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित पुलिस मुख्यालय में वित्त निदेशक के पद पर कार्यरत शंकर झा ने इसे भ्रामक और तथ्यहीन बताया है।

शंकर झा ने अपने बयान में कहा कि श्रद्धेय उद्भट दर्शनशास्त्री वाचस्पति मिश्र के जन्म एवं कर्मस्थल को लेकर पर्याप्त ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक साक्ष्य उपलब्ध हैं, जो अंधराठाढ़ी को ही उनकी जन्मभूमि एवं कर्मभूमि सिद्ध करते हैं। ऐसे में “मंथन जारी” जैसी अभिव्यक्ति न केवल स्थापित तथ्यों को नजरअंदाज करती है, बल्कि मिथिला की ऐतिहासिक पहचान को भी कमजोर करने का कार्य करती है।

उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा अंधराठाढ़ी रेलवे स्टेशन का नाम “वाचस्पति नगर” रखा जाना, शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का वाचस्पति डीह पर आगमन एवं वहां की मिट्टी को श्रद्धापूर्वक ग्रहण करना, विद्वान सहदेव बाबू द्वारा प्रस्तुत ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक साक्ष्य, तथा बिहार सरकार द्वारा वाचस्पति-भामती की स्मृति में आयोजित वार्षिक महोत्सव—ये सभी तथ्य इस स्थल की प्रमाणिकता को पुष्ट करते हैं।

शंकर झा ने मीडिया से भी अपील की कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विषयों पर समाचार प्रकाशित करते समय तथ्यों की गंभीरता और संवेदनशीलता का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि समाज में किसी प्रकार का भ्रम न फैले।
उन्होंने अंधराठाढ़ी एवं मिथिला के नागरिक होने के नाते इस कथन का कड़ा खंडन करते हुए संबंधित वक्ताओं और माध्यमों से इस पर पुनर्विचार करने की भी मांग की है।

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