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हरियाणा में चुनावी हलचल तेज, कई सीटों पर बिना मुकाबले तय हुए नतीजे

हरियाणा में निकाय और पंचायत उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब चुनावी तस्वीर काफी हद तक साफ हो चुकी है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आज पंचकूला में अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी करने जा रही है, जिससे राज्य की राजनीति में नया मोड़ आने की संभावना है।

पंचकूला में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, पार्टी के प्रभारी सतीश पुनिया और प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली शामिल होंगे। इस मौके पर भाजपा अपने विकास कार्यों और आगामी योजनाओं को जनता के सामने रखेगी। पार्टी का यह कदम चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है, खासकर तब जब कांग्रेस पहले ही अपना घोषणा पत्र जारी कर मैदान में उतर चुकी है।

नामांकन प्रक्रिया समाप्त होने के बाद पंचायत उपचुनाव की स्थिति दिलचस्प हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार पंचायत समिति की कुल 588 सीटों पर उपचुनाव प्रस्तावित था। इनमें से 290 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं, जिससे आधे से ज्यादा सीटों पर बिना किसी मुकाबले के ही नतीजे तय हो गए।

निर्विरोध चुने गए प्रतिनिधियों में एक जिला परिषद सदस्य, आठ पंचायत समिति सदस्य, छह सरपंच और 275 पंच शामिल हैं। यह आंकड़ा बताता है कि कई क्षेत्रों में या तो राजनीतिक सहमति बनी या विपक्षी उम्मीदवारों की कमी रही।

हालांकि, कुछ सीटों पर नामांकन न होना चिंता का विषय भी बन गया है। सरपंच की दो सीटों और पंच की 293 सीटों पर किसी भी उम्मीदवार ने नामांकन दाखिल नहीं किया। यह स्थिति स्थानीय स्तर पर लोकतांत्रिक भागीदारी में कमी की ओर इशारा करती है।

राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार जिन सीटों पर चुनाव होना है, वहां 10 मई को मतदान कराया जाएगा। इसमें जिला परिषद की एक सीट, पंचायत समिति की चार सीटें, सरपंच की 24 सीटें और पंच की 28 सीटें शामिल हैं।

पंचायत समिति की 12 सीटों पर नामांकन हुआ था, जिनमें से 8 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए और 4 सीटों पर चुनाव होगा। वहीं, सरपंच पद के लिए 32 सीटों पर नामांकन हुआ, जिनमें 6 सीटों पर बिना मुकाबले जीत हुई, 24 सीटों पर चुनाव होना तय है, जबकि 2 सीटों पर कोई नामांकन नहीं हुआ।

पंच पद पर सबसे अधिक हलचल देखने को मिली। 542 सीटों पर नामांकन दाखिल किया गया, जिनमें से 275 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए। 28 सीटों पर चुनाव होगा, जबकि 239 सीटों पर कोई भी उम्मीदवार सामने नहीं आया।

जिला स्तर पर देखें तो हिसार में सबसे ज्यादा गतिविधि रही। यहां 64 पंच सीटों पर नामांकन हुआ, जिनमें 39 सीटों पर निर्विरोध जीत हुई और 19 सीटों पर मतदान होगा। कैथल में 50 सीटों पर नामांकन हुआ, जिनमें 34 सीटों पर बिना मुकाबले उम्मीदवार चुने गए और 15 सीटों पर चुनाव होगा।

सोनीपत में स्थिति अलग रही, जहां 53 सीटों पर नामांकन हुआ लेकिन 31 सीटों पर कोई उम्मीदवार नहीं मिला। यह राज्य में सबसे अधिक बिना नामांकन वाली सीटें हैं।

पंचकूला में भी कुछ ऐसा ही रुझान देखने को मिला। यहां 23 पंच सीटों में से केवल एक सीट पर निर्विरोध जीत हुई, जबकि 22 सीटों पर कोई नामांकन नहीं हुआ। इससे साफ है कि कुछ क्षेत्रों में चुनाव को लेकर लोगों की रुचि कम होती जा रही है।

निकाय चुनाव में भी स्थिति काफी दिलचस्प बनी हुई है। अंबाला में मेयर पद के चार उम्मीदवारों और पार्षद पद के 21 उम्मीदवारों ने अपने नाम वापस ले लिए हैं, जिससे मुकाबला सीमित हो गया है।

सांपला नगर पालिका में चेयरमैन पद के 15 उम्मीदवारों में से 5 ने नामांकन वापस लिया, जबकि वार्ड स्तर पर भी कई उम्मीदवारों ने चुनाव से दूरी बना ली। इससे कई सीटों पर सीधा मुकाबला देखने को मिल सकता है।

सोनीपत नगर निगम में मेयर पद के लिए अब 9 उम्मीदवार मैदान में बचे हैं। अंतिम दिन भाजपा और कांग्रेस से जुड़े कुछ उम्मीदवारों ने नाम वापस ले लिया, जिससे मुकाबले की दिशा बदल गई। पार्षद पद के लिए भी 28 उम्मीदवारों ने नाम वापस लिया और अब कुल 79 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।

पंचकूला में पार्षद पद के दो उम्मीदवारों ने भी नामांकन वापस लिया है, जिससे यहां भी चुनावी समीकरण प्रभावित हुए हैं।

कुल मिलाकर हरियाणा के निकाय और पंचायत उपचुनाव में इस बार मिश्रित तस्वीर सामने आई है। एक तरफ कई सीटों पर बिना मुकाबले ही नतीजे तय हो गए हैं, तो दूसरी ओर कई सीटों पर उम्मीदवारों की कमी ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब सभी की नजर 10 मई को होने वाले मतदान पर है, जहां जिन सीटों पर चुनाव होना है, वहां मतदाता अपने प्रतिनिधि चुनेंगे। इसके साथ ही राजनीतिक दलों के घोषणा पत्र और प्रचार अभियान आने वाले दिनों में चुनावी माहौल को और भी गर्माने वाले हैं।

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