फरीदाबाद में एक साधारण सी दिखने वाली पंचर की दुकान के पीछे छिपे जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। गाजियाबाद पुलिस ने पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले गिरोह के एक सदस्य नौशाद अली उर्फ लालू को गिरफ्तार किया है। वह पिछले कुछ समय से पेट्रोल पंप पर पंचर बनाने का काम कर रहा था, लेकिन असल में वह देश की संवेदनशील जानकारियां दुश्मन देश तक पहुंचाने में लगा हुआ था।

पुलिस जांच में सामने आया है कि यह कोई छोटा-मोटा मामला नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क है, जिसका सरगना मेरठ का रहने वाला सुहेल मलिक है। इस गिरोह में अब तक 22 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इसके अलावा कुछ अन्य संदिग्धों से पूछताछ जारी है, जिससे और बड़े खुलासों की उम्मीद जताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, नौशाद मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के हरचंदा गांव का रहने वाला है। करीब तीन महीने पहले उसने फरीदाबाद के गांव नचौली में एक पेट्रोल पंप पर अपनी पंचर की दुकान शुरू की थी। इस दौरान उसने खुद को आम मजदूर की तरह पेश किया, ताकि किसी को उस पर शक न हो सके।
गिरफ्तारी की पूरी कार्रवाई 16 मार्च की शाम को हुई, जब गाजियाबाद पुलिस सादे कपड़ों में उसकी तलाश करते हुए मौके पर पहुंची। पुलिस ने पहले पेट्रोल पंप के अन्य कर्मचारियों से सामान्य पूछताछ की और फिर नौशाद के बारे में जानकारी जुटाई। जैसे ही उसकी पहचान की पुष्टि हुई, उसे तुरंत हिरासत में ले लिया गया। इस दौरान पुलिस ने उसका मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया, जिससे कई अहम सुराग मिलने की उम्मीद है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह गिरोह रेलवे स्टेशनों और सुरक्षा बलों से जुड़े संवेदनशील स्थानों की फोटो और वीडियो बनाकर पाकिस्तान भेजता था। इसके लिए व्हाट्सएप ग्रुप का इस्तेमाल किया जाता था। हर फोटो या वीडियो के बदले गिरोह के सदस्यों को 4 से 6 हजार रुपये तक मिलते थे।
इस मामले में एक महिला आरोपी मीरा को भी गिरफ्तार किया गया है, जो मथुरा जिले की रहने वाली है। इसके अलावा एक नाबालिग को भी पकड़ा गया है। पूछताछ में इन सभी ने बताया कि उन्हें इस नेटवर्क में शामिल करने का काम सुहेल मलिक ने किया था, जिसने एक व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए सभी को जोड़ा हुआ था।
जांच में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है कि यह गिरोह देशभर में सोलर कैमरे लगाने की योजना बना रहा था। इन कैमरों के जरिए रेलवे स्टेशन और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों की लाइव निगरानी की जा सकती थी। दिल्ली और हरियाणा के कुछ स्थानों पर ऐसे कैमरे लगाए भी गए थे, जिनका सीधा एक्सेस पाकिस्तान में बैठे लोगों के पास था।
पुलिस ने दिल्ली कैंट और सोनीपत रेलवे स्टेशन के पास लगाए गए कैमरों को बरामद कर लिया है और उन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, गिरोह के सदस्य अब तक 450 से ज्यादा फोटो और वीडियो पाकिस्तान भेज चुके हैं।
पेट्रोल पंप के कर्मचारियों ने बताया कि नौशाद की दुकान वहां के पूर्व मैनेजर की मदद से खुलवाई गई थी। इस पूरी कड़ी में मुमताज नाम का एक व्यक्ति भी शामिल है, जिसने नौशाद को यहां काम दिलवाया। इस तरह यह साफ होता है कि गिरोह के सदस्य एक-दूसरे से जुड़े हुए थे और योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहे थे।
जब पुलिस ने इस मामले की जानकारी अन्य कर्मचारियों को दी, तो वे भी हैरान रह गए। उन्हें पहले लगा था कि यह कोई छोटा अपराध है, लेकिन जब जासूसी और देशद्रोह की बात सामने आई, तो सभी के होश उड़ गए।
इससे पहले भी 14 मार्च को गाजियाबाद के कौशांबी क्षेत्र से 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें गिरोह का सरगना सुहेल मलिक और उसके साथी शामिल थे। इनकी निशानदेही पर ही पुलिस ने आगे की कार्रवाई करते हुए नौशाद तक पहुंच बनाई।
इस पूरे मामले की जांच में यूपी पुलिस, एटीएस, दिल्ली पुलिस और हरियाणा पुलिस मिलकर काम कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह नेटवर्क काफी बड़ा हो सकता है और आने वाले समय में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
यह घटना इस बात का उदाहरण है कि किस तरह सामान्य दिखने वाले लोग भी गंभीर अपराधों में शामिल हो सकते हैं। एक साधारण पंचर की दुकान के पीछे चल रहा यह जासूसी नेटवर्क सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है।
फिलहाल पुलिस सभी आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है और इस नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने की कोशिश में जुटी हुई है। आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े और भी अहम खुलासे होने की संभावना है।
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