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हरियाणा में आयुष्मान-चिरायु योजना से बदली स्वास्थ्य तस्वीर, आधी आबादी तक पहुंचा मुफ्त इलाज का लाभ

हरियाणा में गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को आसान और सुलभ बनाने की दिशा में आयुष्मान-चिरायु योजना एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। राज्य की अनुमानित आबादी करीब 2.75 करोड़ है, जिनमें से लगभग 1.38 करोड़ लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। यह आंकड़ा बताता है कि राज्य की लगभग आधी आबादी अब इस योजना के दायरे में आ चुकी है और जरूरत पड़ने पर मुफ्त इलाज की सुविधा प्राप्त कर सकती है।

इस योजना के तहत पात्र परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जाता है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह हुआ है कि गंभीर बीमारियों के इलाज में आने वाला भारी खर्च अब गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए बाधा नहीं रहा। कैंसर, हृदय रोग, किडनी फेलियर जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज अब बड़ी संख्या में लोगों के लिए संभव हो पाया है।

आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत वर्ष 2018 में केंद्र सरकार द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य देश के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को स्वास्थ्य सुरक्षा देना था, ताकि कोई भी व्यक्ति पैसे की कमी के कारण इलाज से वंचित न रहे। हरियाणा सरकार ने इस योजना को आगे बढ़ाते हुए आयुष्मान-चिरायु योजना के रूप में इसे और व्यापक रूप दिया, जिससे अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें।

नवंबर 2022 में राज्य सरकार ने इस योजना में बड़ा बदलाव करते हुए आय सीमा को बढ़ा दिया। इसके तहत अब सालाना 3 लाख रुपये तक की आय वाले परिवारों को भी योजना में शामिल किया गया है। इस बदलाव के बाद लाखों नए परिवार इस योजना से जुड़ गए और स्वास्थ्य सुरक्षा का दायरा काफी बढ़ गया।

राज्य में इस योजना को सफल बनाने के लिए एक मजबूत अस्पताल नेटवर्क तैयार किया गया है। कुल 1,363 अस्पताल इस योजना के तहत पैनल में शामिल हैं, जिनमें 777 निजी और 586 सरकारी अस्पताल शामिल हैं। इस नेटवर्क की वजह से लाभार्थियों को इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़ता और अपने ही जिले या आसपास के क्षेत्र में उपचार मिल जाता है।

इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि मरीज को इलाज के लिए किसी भी प्रकार का भुगतान नहीं करना पड़ता। अस्पताल में भर्ती से लेकर ऑपरेशन, दवाइयां और जांच तक का पूरा खर्च इस योजना के तहत कवर किया जाता है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर पड़ने वाला बोझ काफी कम हुआ है।

पहले गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए लोग या तो कर्ज लेते थे या अपनी जमीन-जायदाद बेचने को मजबूर हो जाते थे। लेकिन अब स्थिति बदल रही है। आयुष्मान-चिरायु योजना ने स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों की पहुंच में लाकर एक बड़ी राहत दी है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अजय महाजन का कहना है कि यह योजना गरीब वर्ग के लिए बेहद उपयोगी है। उनके अनुसार, यदि इस योजना को सही तरीके से लागू किया जाए तो यह देश की स्वास्थ्य व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि पहले हार्ट और किडनी जैसी बीमारियों का इलाज आम लोगों के लिए लगभग असंभव था, लेकिन अब यह संभव हो पाया है।

हालांकि, कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि योजना के क्रियान्वयन में अभी सुधार की गुंजाइश है। कुछ निजी अस्पताल धीरे-धीरे इस योजना से दूरी बना रहे हैं या सीमित सेवाएं दे रहे हैं, जिससे कुछ क्षेत्रों में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसके बावजूद सरकारी अस्पताल और पैनल में शामिल संस्थान लगातार सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।

इस योजना ने न केवल इलाज को आसान बनाया है, बल्कि लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ाई है। अब लोग समय पर जांच और इलाज के लिए आगे आ रहे हैं, जिससे बीमारियों का शुरुआती स्तर पर ही पता लगाकर उनका इलाज किया जा रहा है।

आयुष्मान-चिरायु योजना के तहत लाभार्थियों को एक डिजिटल आयुष्मान कार्ड दिया जाता है। यह कार्ड अस्पताल में दिखाकर मरीज कैशलेस इलाज प्राप्त कर सकता है। इससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सरल हो गई है। मरीज और अस्पताल दोनों के लिए यह प्रणाली काफी सुविधाजनक साबित हो रही है।

राज्य सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में और अधिक पात्र परिवारों को इस योजना के दायरे में लाया जाए। इसके लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि हर जरूरतमंद व्यक्ति इस योजना का लाभ उठा सके और कोई भी व्यक्ति इलाज से वंचित न रहे।

कुल मिलाकर, आयुष्मान-चिरायु योजना हरियाणा में स्वास्थ्य सुरक्षा की एक मजबूत व्यवस्था के रूप में उभर रही है। यह योजना न केवल गरीब और मध्यम वर्ग को आर्थिक राहत दे रही है, बल्कि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को भी एक नई दिशा प्रदान कर रही है। आने वाले वर्षों में इसके और अधिक प्रभावी होने की उम्मीद है, जिससे हर व्यक्ति को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।

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