सिरमौर (हिमाचल प्रदेश)।
बदलते दौर में शादियों और सामाजिक कार्यक्रमों पर बढ़ता खर्च आम परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। इसी समस्या से निपटने के लिए सिरमौर जिले के गिरिपार क्षेत्र के टौरू गांव ने सामूहिक सहमति से ऐसे फैसले लिए हैं, जो पूरे समाज के लिए उदाहरण बन सकते हैं।

गांववासियों ने तय किया है कि अब शादी, बच्चे के जन्म और मृत्यु भोज जैसे आयोजनों में दिखावे और अनावश्यक खर्च से बचा जाएगा। इन निर्णयों के तहत शादी समारोह में शराब परोसने पर पूरी तरह रोक रहेगी और डीजे केवल एक दिन ही बजेगा। इसके अलावा शादी में काम करने वालों के लिए बकरा काटने की परंपरा भी समाप्त कर दी गई है।
कम मेहमान, सीमित आयोजन
ग्रामीणों ने बताया कि शादी के बाद होने वाली ‘पलटोज पार्टी’ को भी सीमित किया गया है। अब इस कार्यक्रम में केवल नजदीकी परिवार, पड़ोसी और गांव के प्रमुख लोगों को ही बुलाया जाएगा। पहले इस आयोजन में 1,500 से अधिक लोग शामिल हो जाते थे, जिससे खर्च काफी बढ़ जाता था।
पांच दिन की शादी अब सादगी की ओर
परंपरागत रूप से यहां शादी के कार्यक्रम पांच दिन तक चलते थे—हर दिन अलग रस्म और अलग भोज होता था। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर भारी बोझ पड़ता था। नए फैसलों के बाद रस्मों को सीमित किया गया है ताकि कोई भी परिवार कर्ज लेने के लिए मजबूर न हो।
जन्म और शोक कार्यक्रम भी सादे
बच्चे के जन्म पर होने वाले कार्यक्रम अब केवल पहले बेटे के जन्म तक सीमित रहेंगे, वह भी बहुत कम लोगों की मौजूदगी में। वहीं, किसी की मृत्यु के बाद शोक और बरसी के आयोजन केवल परिवार तक ही सीमित रखे जाएंगे।
हर साल होगी बड़ी बचत
ग्रामीणों के अनुसार पहले एक शादी पर 10 से 15 लाख रुपये तक खर्च हो जाता था। नए नियमों के बाद यह खर्च घटकर करीब 5 लाख रुपये रह जाएगा। गांव में सालभर में होने वाली शादियों को देखें तो इससे हर साल करीब एक करोड़ रुपये से अधिक की बचत संभव होगी।
गांव के बुजुर्गों और युवाओं का मानना है कि ये फैसले सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने और सादगी को बढ़ावा देने की दिशा में एक मजबूत कदम हैं।
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