नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां महज 15 हजार रुपये महीने की डाटा एंट्री की नौकरी करने वाले युवक की पहचान का दुरुपयोग कर करीब 48 करोड़ रुपये की हेराफेरी कर ली गई। पीड़ित युवक को इसकी भनक तक नहीं लगी, लेकिन जब आयकर विभाग का नोटिस पहुंचा तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई।

बिहार के सिवान जिले का रहने वाला करन कुमार राम वर्ष 2019 में रोजगार की तलाश में दिल्ली आया था। एक परिचित के जरिए उसे उत्तरी दिल्ली के इंद्रलोक इलाके में स्थित एक जूता कंपनी में डाटा एंट्री ऑपरेटर की नौकरी मिल गई। सैलरी 15 हजार रुपये तय हुई और काम के नाम पर उससे आधार और पैन कार्ड ले लिए गए।
खाता खोलने के नाम पर किया गया खेल
कंपनी की ओर से सैलरी अकाउंट खोलने का बहाना बनाकर करन के दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि इसी दौरान उसके नाम से करंट अकाउंट खुलवाया गया और बाद में एक फर्जी कंपनी भी खड़ी कर दी गई। कुछ महीनों तक काम करने के बाद करन दिवाली पर अपने गांव लौट गया और फिर दिल्ली वापस नहीं आया।
करीब तीन साल बाद, 31 जनवरी 2023 को करन को कर्नाटक स्थित आयकर विभाग से नोटिस मिला। नोटिस में बताया गया कि उसके नाम पर एक कंपनी पंजीकृत है, जिसका जीएसटी नंबर भी है और वर्ष 2020-21 में उस खाते से करीब 48 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है। इसके अलावा 2019-20 में भी 35 लाख रुपये से अधिक का ट्रांजैक्शन दिखाया गया है।
नोटिस पढ़ते ही उड़ गए होश
करन का कहना है कि उसने कभी इतनी बड़ी रकम देखी तक नहीं थी। नोटिस मिलने के बाद उसने खुद को निर्दोष बताते हुए सिवान की जिला अदालत में आवेदन दिया। इसके बाद दिसंबर 2023 में गुरुग्राम और फिर सिवान के आयकर कार्यालय से भी इसी तरह के नोटिस आए, जिससे उसकी परेशानी और बढ़ गई।
ईओडब्ल्यू ने दर्ज किया मामला
आयकर विभाग की ओर से लगातार सवालों के बाद करन ने 24 दिसंबर 2025 को दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) में शिकायत दर्ज कराई। जांच के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और पूरे नेटवर्क की पड़ताल शुरू कर दी गई है।
कैश सैलरी, फिर भी मांगे गए दस्तावेज
पीड़ित के मुताबिक, उसकी सैलरी कैश में दी जाती थी, इसके बावजूद सैलरी अकाउंट खोलने के नाम पर उससे आधार और पैन कार्ड मांगे गए। आरोपी ने किसी बहाने से उसके आधार कार्ड का पता भी बदलवा दिया। बाद में उसे दिल्ली वापस न बुलाकर बिहार में ही रहने को कहा गया।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि करन की पहचान का इस्तेमाल कर फर्जी कंपनी किसने चलाई और 48 करोड़ रुपये की रकम कहां-कहां ट्रांसफर की गई।
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